
मुजफ्फरपुर: राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर समाहरणालय सभागार में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता जिला पदाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने की। इस परिचर्चा का विषय “प्रेस का बदलता स्वरूप” था, जिसमें मीडिया कर्मियों ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया की विभिन्न कालखंडों में आवश्यकता, उपयोगिता, महत्व, कार्य करने के तरीकों और बदलते समय के अनुसार मीडिया के विविध स्वरूपों में आए बदलावों पर चर्चा की।

इस परिचर्चा में प्रतिभागियों ने पुराने जमाने में खबरों के संकलन और संप्रेषण के तरीकों का विश्लेषण किया और वर्तमान समय में स्मार्टफोन और इंटरनेट के जमाने में खबरों के संकलन और संप्रेषण में आई सुगमता पर चर्चा की। इसके अलावा, खबरों की विविधता और तीव्र गति से फैलने के साथ-साथ पत्रकारों की बढ़ती संख्या पर भी चर्चा हुई। कई प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए और मीडिया में कार्य करने के तरीकों पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस हर साल 16 नवंबर को मनाया जाता है, जो कि भारत में स्वतंत्र और स्वतंत्र प्रेस के महत्व को उजागर करता है ¹। यह दिन लोकतंत्र के चार स्तंभों में से एक के रूप में पत्रकारिता की भूमिका को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।
मुख्य बिंदु:
मीडिया का विकास: प्रिंट से डिजिटल तक मीडिया के विकास का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
खबरों का संकलन: पुराने तरीकों से लेकर स्मार्टफोन के युग में खबरों के संकलन और प्रसारण में आए बदलावों पर चर्चा हुई।
मीडिया की भूमिका: जनहित के मुद्दों पर मीडिया की भूमिका और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में इसकी भागीदारी पर जोर दिया गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव: मीडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर चर्चा हुई।
प्रशासन और मीडिया: मीडिया द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाइयों पर चर्चा हुई।
विशेष:
सभी वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए और मीडिया के भविष्य पर अपने विचार व्यक्त किए।
जिला पदाधिकारी ने मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह समारोह मीडिया के बदलते स्वरूप और इसकी चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का मंच साबित हुआ।
जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय प्रेस दिवस समारोह में मीडिया के बदलते स्वरूप पर गहन चर्चा हुई।