सुगौली के मेहवा स्कूल में छात्रों का हंगामा, अव्यवस्थाओं के खिलाफ जमकर किया प्रदर्शन छात्रों ने बेंच-डेस्क में लगाई आग

Tirhut News

मोतिहारी: बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है, लेकिन अब गांव के छात्र और अभिभावक भी सरकारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। मंगलवार को मोतिहारी जिले के सुगौली प्रखंड स्थित उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय, मेहवा में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर छात्रों ने जमकर हंगामा किया, तोड़फोड़ की और बेंच-डेस्क में आग लगा दी।

छात्रों ने विद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई की समुचित व्यवस्था नहीं है, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता खराब है, और कई सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा।

छात्रों और अभिभावकों के आरोप

• विद्यालय में पढ़ाई की व्यवस्था ठीक नहीं है।

• मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है।

• पोशाक राशि समय पर नहीं मिलती, जिससे छात्रों को आर्थिक परेशानी होती है।

• विद्यालय के शौचालयों में ताला लगा रहता है, जिससे छात्र-छात्राओं को भारी दिक्कत होती है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

छात्रों के हंगामे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण विद्यालय पहुंच गए। समाजसेवी पवन चौरसिया ने विद्यालय की स्थिति को दयनीय बताया और कहा कि किचन की व्यवस्था भी खराब होने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन लापरवाह है और सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सही तरीके से छात्रों तक नहीं पहुंच रहा। अधिकारी निरीक्षण के लिए आते भी हैं, तो केवल खानापूर्ति कर चले जाते हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

विद्यालय में हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। वहीं, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) रामविजय यादव भी विद्यालय पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

बीईओ रामविजय यादव ने कहा कि छात्रों के आरोप गंभीर हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोशाक राशि में देरी पोर्टल की समस्या के कारण हुई है, लेकिन फिर भी विद्यालय के प्रधानाध्यापक (एचएम) से जवाब तलब किया जाएगा।

निष्कर्ष

इस घटना ने सरकारी विद्यालयों में जारी अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा किया है। छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी को देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाए।

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