
मुजफ्फरपुर: “पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। मंजिल उन्हीं को मिलती है जो अपनी लड़ाई स्वयं लड़ते हैं।” अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बार एसोसिएशन एवं बिहार फेडरेशन ऑफ वूमेन लॉयर्स के संयुक्त तत्वाधान में बार लाइब्रेरी भवन में आयोजित “महिला संवाद” में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्वेता कुमारी सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा दिलाना उनकी प्रथम प्राथमिकता होगी।
प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश नमिता सिंह ने कहा, “सशक्त नारी, सशक्त समाज की पहचान है। महिलाएं न केवल परिवार की रीढ़ होती हैं बल्कि समाज, देश और दुनिया के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।”
महिलाओं को समान अधिकार के लिए अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा
संघ की अध्यक्ष डॉ. संगीता शाही ने अतिथियों का स्वागत किया और महिला सशक्तिकरण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं से चुनौतियों का सामना कर आगे बढ़ने और अपनी पहचान खुद गढ़ने का आह्वान किया।
समारोह को जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव अखिलेश्वर प्रसाद सिंह और रवि प्रताप, सहायक सचिव कमलेश्वर महतो, पूर्व संयुक्त सचिव विनोद कुमार ने भी संबोधित किया।
महिला अधिवक्ताओं की मजबूत भागीदारी
इस अवसर पर रंजू सिन्हा, ऋचा स्मृति, कंचन कुमारी, शिल्पी खुशबू, अर्चना शाही, सुमन कुमारी, मधु कुमारी, प्रीति रंजन, कल्याणी कपूर, कनीज फातिमा, कंचन सुधा, सोनम कुमारी, रूपम, रागिनी, मेनका, कुमारी प्रियंका सिंह, वंदना प्रीतम, अनुप्रिया, अलका शरण, सविता, पल्लवी, रानी, नीता, सोनी, कुमारी रंजना समेत कई महिला अधिवक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
न्याय और समानता की दिशा में मजबूत कदम
इस कार्यक्रम में महिलाओं की भूमिका और उनके अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। महिला अधिवक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि समाज में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करने के लिए कानून और समाज, दोनों स्तरों पर प्रयास करने की जरूरत है।
(तिरहूत न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)