गांवों को गोद लेकर भूल गए सांसद, दस साल बाद भी योजनाएं अधूरी

Tirhut News

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य को भेजी सांसदों के आदर्श ग्राम की रिपोर्ट, विभाग से पूछा योजनाएं अधूरी रहने का कारण
तिरहूत न्यूज डेस्क | मुजफ्फरपुर

2014 से 2024 तक सांसद आदर्श ग्राम योजना का जो सपना संजोया गया था, वह अधूरा ही रह गया। मुजफ्फरपुर जिले के चार सांसदों द्वारा गोद लिए गए गांवों में से ज्यादातर में विकास कार्य या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हो सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने इस योजना की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।

10 साल में 883 योजनाएं अधर में, सिर्फ 5 गांवों में हुआ पूरा विकास

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से अब तक पूरे बिहार में 189 पंचायतों को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चुना गया। इनमें से सिर्फ 5 गांवों में ही सभी योजनाएं पूरी हो पाईं, जबकि 883 योजनाओं पर काम शुरू तक नहीं हुआ।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर महानिदेशक महेंद्र कुमार उज्जैनिया ने यह रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है और पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इतनी योजनाएं लंबित रह गईं? मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि सांसद चाहें तो अब पंचायत की सूची में बदलाव कर सकते हैं।

मुजफ्फरपुर: अधूरी योजनाओं का लेखा-जोखा

1️⃣ अजय निषाद (पूर्व सांसद, मुजफ्फरपुर)

• फेज-1: जजुआर पश्चिमी में 157 योजनाएं लीं, 57 अब भी अधूरी

• फेज-4: भरतीपुर को चुना, लेकिन एक भी योजना नहीं ली गई।

• फेज-5: हरसिंहपुर लौतन में भी एक भी योजना नहीं।

• फेज-6, 7 और 8 में भी स्थिति जस की तस।

निषाद का बयान: “अधिकारियों की शिथिलता के कारण योजनाएं पूरी नहीं हो सकीं। अब जो संभव होगा, उसे पूरा किया जाएगा।”

2️⃣ डॉ. अनिल सहनी (पूर्व राज्यसभा सांसद)

• फेज-1: पिलखी गायपट्टी में 21 योजनाएं लीं, लेकिन एक भी शुरू नहीं हुई

• रिपोर्ट में शून्य कार्य बताया गया।

3️⃣ वीणा देवी (सांसद, वैशाली)

• फेज-1: घटना गांव में 41 योजनाएं चुनीं, लेकिन 18 ही पूरी हुईं

• फेज-5, 6 और 7 में आदर्श ग्राम चुने गए, लेकिन एक भी योजना शुरू नहीं हुई।

🔴 वीणा देवी का बयान: “अब पंचायत परिवर्तन का विकल्प अपनाकर समाधान निकाला जाएगा।”

4️⃣ रामा किशोर सिंह (पूर्व सांसद, वैशाली)

• फेज-1: घोसौत को आदर्श ग्राम चुना, 65 योजनाएं लीं, लेकिन कोई काम नहीं हुआ

गांवों को मिला केवल आश्वासन, खुद बना रहे सुविधाएं

योजनाओं के अधूरे रहने से ग्रामीण अब खुद अपने दम पर सुविधाएं जुटाने को मजबूर हैं। वैशाली जिले के हरशेर घाट पर पुल की उम्मीद पूरी नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने खुद चचरी बना ली। यही हाल कई अन्य गांवों का भी है, जहां विकास का सपना अभी भी अधूरा है।

10 साल, 3361 गांव, 26015 योजनाएं और नतीजा?

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 10 वर्षों में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 3361 गांवों में 26015 योजनाएं शुरू होनी थीं, लेकिन इनमें से हजारों योजनाएं अभी भी ठंडे बस्ते में हैं।

अब सवाल यह है कि क्या ये योजनाएं कभी पूरी होंगी या अगले चुनाव तक यह मुद्दा सिर्फ कागजों में ही रहेगा? क्या सांसद अपनी जिम्मेदारी लेंगे, या ग्रामीणों को फिर से खुद अपने हाल पर छोड़ दिया जाएगा?

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