
नई दिल्ली | लोकसभा में मंगलवार को वक्फ संशोधन बिल 2024 को बहुमत से पारित कर दिया गया। इस बिल के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। इस बिल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी बहस देखने को मिली। सरकार का दावा है कि यह बिल पूरी तरह संवैधानिक और निष्पक्ष है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर सीधा हमला है।
सरकार का पक्ष: ‘हर जमीन देश की संपत्ति’
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कहा, ”यह बिल पूरी तरह संवैधानिक है और सरकार सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा कर रही है। कुछ लोगों ने बिना किसी ठोस आधार के अनावश्यक मुद्दे उठाए हैं। हर जमीन देश की संपत्ति है, इसे किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ बताना गलत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि, ”हम मुस्लिम समाज को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। वक्फ संपत्तियों को लेकर अतीत में कई विवाद रहे हैं, लेकिन यह बिल उन सभी मुद्दों को हल करेगा।”
ओवैसी का तीखा विरोध: ‘यह मुस्लिमों के साथ अन्याय’
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे मुसलमानों के अधिकारों का हनन बताया। उन्होंने कहा, ”जब हिंदू, बौद्ध और जैन समुदायों को अपने धार्मिक संस्थानों को संचालित करने का अधिकार है, तो फिर मुस्लिमों से वक्फ की संपत्ति क्यों छीनी जा रही है?”
ओवैसी ने गांधीजी के एक किस्से का हवाला देते हुए लोकसभा में बिल की प्रति को फाड़ दिया और कहा, ”जिस तरह महात्मा गांधी ने अन्यायपूर्ण कानून को नकारा था, उसी तरह मैं भी इसे अस्वीकार करता हूँ।”
‘बीजेपी खुलकर मुसलमानों को उनकी औकात याद दिलाती है’
बारामूला से निर्दलीय सांसद अब्दुल रशीद शेख ने भी इस बिल का कड़ा विरोध किया और कहा, ”बीजेपी खुलेआम मुसलमानों को उनकी औकात याद दिलाती है, जबकि कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता के नाम पर धोखा देती है।”
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल का बयान
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने लोकसभा में कहा कि सरकार ने जेपीसी की सभी सिफारिशों को मान लिया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ”सरकार के पास बहुमत था, फिर भी उसने सभी नियमों का पालन किया और प्रक्रिया को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया।”
राजनीतिक हलकों में हंगामा, आगे क्या?
वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यदि राज्यसभा से भी इसे मंजूरी मिलती है, तो यह राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून का रूप ले लेगा।
इस बिल को लेकर देशभर में तीखी बहस छिड़ गई है। एक ओर सरकार इसे पारदर्शी और सुधारात्मक कदम बता रही है, तो दूसरी ओर मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे समुदाय के लिए घातक बताया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमाने की संभावना है।
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